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August 2, 2026
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उत्तराखंड

अगस्त्यमुनि: 15 साल बाद देवरा यात्रा, देव डोली मार्ग में अवरोध से नाराज हुए अगस्त्य ऋषि.. केदारनाथ हाईवे पर घंटों जाम

अगस्त्य ऋषि मुनि महाराज की देव डोली स्टेडियम मार्ग पर बने गेट के कारण आगे नहीं बढ़ सकी। डोली के रुकने से केदारनाथ हाईवे पर कई घंटों तक लंबा जाम लगा, देर शाम देव डोली नाराज होकर मंदिर वापस लौट गई।

देहरादून: उत्तराखंड की भूमि को यूं ही देवभूमि नहीं कहा जाता है, बल्कि यहां की धरती पर हर जगह देवताओं का वास है। लेकिन आज के समय में लोग शायद ये बात भूल चुके हैं? इसलिए तो रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि में स्थित मैदान “जिसे अगस्त्य ऋषि मुनि महाराज की तप भूमि कहा जाता है” को यहां के नेताओं और लोगों ने अपने निजी स्वार्थ और आधुनिकता के चक्कर में बर्बाद कर दिया है। अपने तपस्थल की ऐसी हालत देखकर आज स्वयं अगस्त्य ऋषि मुनि महाराज नाराज हो गए। उम्मीद है कि आज अगस्त्यमुनि में लगे घंटों के जाम ने यहां के नेताओं की आँखें खोल दी होंगी।

Agastya Rishi Doli Stopped Traffic Jam on Kedarnath Highway

रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि में आज 14 जनवरी को मकर संक्रांति के पावन अवसर पर अगस्त्य ऋषि मुनि महाराज की चल विग्रह देव डोली 15 सालों के बाद क्षेत्र भ्रमण के लिए निकाली गई। लगभग 15 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद निकली इस दिवारा यात्रा को देखने और आशीर्वाद लेने के लिए क्षेत्रभर से श्रद्धालु उमड़ पड़े। डोली जैसे ही मंदिर परिसर से बाहर निकली, पूरे क्षेत्र में “मुनि महाराज की जय” के जयकारे गूंज उठे।

स्टेडियम का गेट बना देवडोली मार्ग में बाधा

देव डोली जब अगस्त्य ऋषि सैण (मुख्य क्षेत्र) की ओर अग्रसर हुई, तो रास्ते में स्टेडियम के समीप बने गेट के कारण यात्रा आगे नहीं बढ़ सकी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे देव अप्रसन्नता के रूप में देखा गया। डोली को मनाने के लिए पुजारी, स्थानीय लोग और श्रद्धालु लंबे समय तक प्रयास करते रहे, लेकिन डोली वहीं रुक गई।

केदारनाथ हाईवे पर 4 किलोमीटर लंबा जाम

डोली के रुकते ही केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। हाईवे के दोनों ओर तीन से चार किलोमीटर लंबा जाम लग गया, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही और श्रद्धालु सड़क पर ही डटे रहे। काफी देर तक प्रयासों के बावजूद जब स्थिति सामान्य नहीं हो सकी, तो अगस्त्य ऋषि मुनि महाराज की देव डोली नाराज होकर वापस मंदिर परिसर की ओर लौट गई। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने प्रशासन और स्थानीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए।

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