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August 2, 2026
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उत्तराखंड

दून ऑटो रिक्शा यूनियन का सीएम आवास कूच, पुलिस बैरिकेडिंग के बाद धरने पर बैठे चालक, जानिए प्रमुख मांगें

देहरादून: दून ऑटो रिक्शा यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री आवास कूच किया, लेकिन पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को ग्लोब चौक के पास रोक दिया. इसके बाद यूनियन से जुड़े लोग सड़क पर ही धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया.

दून ऑटो रिक्शा यूनियन के अध्यक्ष पंकज अरोड़ा ने कहा कि पिछले 55 सालों से ऑटो चालक देहरादून के बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन व अन्य स्थानों पर अपने वाहन खड़े करते आए हैं. इन स्थानों पर नगर निगम ने यूनियन को चिन्हित करके स्टैंड दिए हैं. उन्होंने कहा कि देहरादून के ऑटो चालक बाहर से आए पर्यटकों, सैलानियों और उनके सामान को डोर टू डोर पहुंचने का काम करते आए हैं.

यदि किसी पर्यटक या सवारी का सामान भूलवश ऑटो में छूट जाता है, तो उस सामान को सम्मानपूर्वक सही हाथों में पहुंचा दिया जाता है. उसके बावजूद उत्तराखंड सरकार दोहरी नीति अपना रही है. हम रजिस्ट्रेशन फीस, रोड टैक्स और फिटनेस टेस्ट ईमानदारी से देते आए हैं. इन सबके बावजूद सरकार ऑटो चालकों की रोजी-रोटी छीनने का काम कर रही है.

उन्होंने कहा कि सरकार ने कई प्रकार के वाहन वहां संचालित करने की परमिशन दे रखी है, जिस कारण आए दिन कोई न कोई दुर्घटना तो होती रहती है. सीएनजी युक्त ऑटो चलाने वालों को भी रोजगार नहीं मिल पा रहा है. यूनियन के सदस्यों ने सरकार के सामने कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं.

यूनियन के महामंत्री और अध्यक्ष पंकज अरोड़ा का कहना है कि देहरादून में दोपहिया वाहन निजी नंबर प्लेटों में ऑनलाइन तरीके से वाणिज्यिक वाहन के तौर पर काम कर रहे हैं. जिस कारण सीएनजी ऑटो रिक्शा चालकों के काम पर काफी प्रभाव पड़ा है, जो कि गंभीर चिंता का विषय है.

इलेक्ट्रिक ऑटो या रिक्शाओं का रजिस्ट्रेशन तत्काल कम से कम 10 साल के लिए बंद किया जाए. क्योंकि, इलेक्ट्रिक ऑटो की संख्या शहर में काफी ज्यादा हो गई है. जिसकी वजह से सीएनजी ऑटो चालकों को काम नहीं मिल पा रहा है. इसके अलावा ऑटो रिक्शा में 3 +1 के परमिट परिधि की दूरी 25 किलोमीटर से बढ़ाकर 40 किलोमीटर की जाए.

या फिर ऑटो चालकों को सवारी लेकर जौलीग्रांट एयरपोर्ट तक आने-जाने की अनुमति दी जाए. शहर में बढ़ते जा रहे ई रिक्शा मुख्य मार्ग पर संचालित किए जा रहे हैं, जिन्हें नियमानुसार मुख्य सड़कों से हटा कर मोहल्ले और गलियों में संचालित किया जाए. इसके साथ ही फिटनेस सेंटर को देहरादून जिले के केंद्र में लाया जाए या उसकी मैन्युअल किया जाए. साथ ही नजदीकी जगह पर केंद्र खोले जाएं.

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