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August 3, 2026
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उत्तराखंड

AIIMS ऋषिकेश में भावुक कर देने वाला दृश्य, 8 दिन की नवजात की मौत के बाद देहदान

ऋषिकेश: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मानवता को झकझोर देने वाली एक मिसाल देखने को मिली। महज 8 दिन की नवजात बच्ची की मृत्यु के बाद उसके माता-पिता ने टूटे दिल के बावजूद चिकित्सा शिक्षा के लिए उसका देहदान कर दिया। इस फैसले ने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।

Body donated after newborn death at AIIMS Rishikesh

बीते 2 जनवरी को चमोली जिले की निवासी हंसी देवी, पत्नी संदीप राम ने मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में एक बच्ची को जन्म दिया। जन्म से ही नवजात की आंतों में गैंग्लिया का अभाव पाया गया, जो एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति थी। हालत नाजुक होने पर 4 जनवरी को नवजात को एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया। एम्स में डॉक्टरों ने नवजात का ऑपरेशन किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद रविवार को रिफ्रैक्टरी सेप्टिक शॉक के कारण बच्ची की मौत हो गई। अपने जिगर के टुकड़े को खोने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।

मोहन फाउंडेशन ने कराया देहदान का मार्ग प्रशस्त

एम्स के नर्सिंग स्टाफ ने परिजनों का संपर्क मोहन फाउंडेशन उत्तराखंड के प्रोजेक्ट लीडर संचित अरोड़ा से कराया। अरोड़ा, नेत्रदान कार्यकर्ता और लायंस क्लब ऋषिकेश देवभूमि के चार्टर अध्यक्ष गोपाल नारंग के साथ एम्स पहुंचे और परिजनों को देहदान के महत्व की जानकारी दी। परिजनों की सहमति के बाद एम्स ऋषिकेश के एनाटॉमी विभाग से संपर्क कर सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं और नवजात की देह विभाग को सौंपी गई। इससे मेडिकल छात्र अध्ययन और शोध के माध्यम से भविष्य में अन्य बच्चों की जान बचाने में सक्षम हो सकेंगे।

तमाम प्रयासों के बावजूद नहीं बचा मासूम

नवजात के पिता संदीप राम ने कहा कि उनका बच्चा जन्म से ही गंभीर बीमारी से पीड़ित था और तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका। उन्होंने कहा, “हमने सोचा कि भले ही हमारा बच्चा इस दुनिया में न रह सका, लेकिन उसका शरीर किसी और बच्चे के जीवन की उम्मीद बन सकता है।” संदीप राम ने बताया कि उनका यह निर्णय केवल एक भावना से जुड़ा था— कि उनके बच्चे की मौत किसी और के जीवन की रोशनी बन जाए। आज यह नवजात, मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और मानव कल्याण के माध्यम से अमर हो गई है।

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